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डॉ. सुरभि शुक्ला : सत्ता नहीं, सेवा है राजनीति का असली चेहरा

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6 साल की बेटी ने पापा से बात की जिद की तो मुस्कान ने बोल दिया कि पापा इस डृम में है फिर क्या हुआ छोटी सी लाडली बच्ची पापा को इधर-उधर कमरों में खोजा करती थी उसकी खोज और जिद ने उसके पापा को मारने वाले को मृत्यु दंड तक पहुंचाया
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डॉ. सुरभि शुक्ला : सत्ता नहीं, सेवा है राजनीति का असली चेहरा

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डॉ. सुरभि शुक्ला : सत्ता नहीं, सेवा है राजनीति का असली चेहरा

9/9/2026
सुल्तानपुर / लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी बेबाकी, जुझारूपन और जनसेवा के लिए पहचानी जाने वाली पूर्व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री डॉ. सुरभि शुक्ला आज भी लोगों के दिलों में एक संवेदनशील जननेत्री के रूप में बसी हुई हैं।

समाजवादी पार्टी सरकार में 2012 से 2017 के बीच दो बार राज्य मंत्री का दर्जा, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष, आवास विकास परिषद की उपाध्यक्ष और SCERT की अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहने के बावजूद उन्होंने कभी खुद को सत्ता तक सीमित नहीं रखा। उनका असली कार्यक्षेत्र हमेशा सड़क और समाज रहा है।

सुल्तानपुर बस अड्डे पर लोहिया प्रतिमा – विचारों को सम्मान
डॉ. शुक्ला की सोच का प्रतीक सुल्तानपुर शहर के बस अड्डे के निकट चौराहे पर स्थापित डॉ. राम मनोहर लोहिया जी की प्रतिमा है। समाजवादी विचारधारा में गहरी आस्था रखने वाली डॉ. शुक्ला ने इस प्रतिमा की स्थापना करवाई ताकि युवाओं और आम जन में लोहिया जी के सामाजिक न्याय के विचार जीवित रहें। आज यह चौराहा केवल एक चौराहा नहीं, बल्कि समाजवादी मूल्यों का स्मारक बन चुका है, जहां हर वर्ष लोग श्रद्धा से माल्यार्पण करते हैं।

गरीब, पीड़ित और असहायों की मसीहा
सुल्तानपुर, लम्भुआ और पूरे पूर्वांचल में डॉ. सुरभि शुक्ला को लोग ‘दीदी’ के नाम से जानते हैं। कोरोना काल हो, बाढ़ हो या किसी गरीब परिवार की बेटी की शादी – वे हमेशा मदद के लिए सबसे आगे खड़ी मिलती हैं। उनके दरवाजे से आज तक कोई भी असहाय व्यक्ति खाली हाथ नहीं लौटा है। यही कारण है कि बड़े पदों से हटने के बाद भी उनके कार्यक्रमों में भारी भीड़ उमड़ती है।
महिला आयोग में रहते हुए दिलाया न्याय
जब वे उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष थीं, तब उन्होंने प्रदेश भर की पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए ऐतिहासिक कार्य किया।

थानों में फटकार खाकर लौट रही महिलाओं की शिकायतों को उन्होंने गंभीरता से सुना, खुद जिलों में जाकर जनसुनवाई की और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई सुनिश्चित कराई। दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और शोषण के सैकड़ों मामलों में उनकी पहल से पीड़िताओं को न्याय मिला। आयोग के कार्यालय को उन्होंने ‘न्याय का दरबार’ बना दिया था, जहां हर महिला बिना डर के अपनी बात रख सकती थी।

राजनीति में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं – 2016 में शिवपाल-अखिलेश विवाद के चलते उन्हें और उनके पति डॉ. संदीप शुक्ला (पूर्व सलाहकार, UPRNN) को पदों से बर्खास्त भी होना पड़ा, 2020 में उन्होंने आम आदमी पार्टी का भी रुख किया, लेकिन उन्होंने कभी जनसेवा का रास्ता नहीं छोड़ा। आज फिर वे समाजवादी पार्टी को सुल्तानपुर-लम्भुआ में मजबूत करने के लिए सक्रिय हैं।

सुल्तानपुर के लोग कहते हैं – “डॉ. सुरभि शुक्ला पद पर रहें या न रहें, वे हमेशा हमारी मदद के लिए तैयार रहती हैं। यही एक सच्चे जननेता की पहचान है।” डीआर सूरज शुक्ला को मुलायम सिंह का आशीर्वाद मिलता था वह सपा परिवार की करीबी है आज भी अखिलेश यादव जी उन्हें मानते हैं सुल्तानपुर की विधानसभा में से उन्हें चुने जाने पर सुल्तानपुर को ढेर सारा लाभ मिलेगा


संपादक
आपकी बात समाचार
अशोक कुमार पाण्डेय

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